माइक्रोसाफ्ट पर 54 अरब का भारी जुर्माना

ब्रुसेल्स। यूरोपीय आयोग के नियामकों ने माइक्रोसाफ्ट पर 1.35 अरब डालर का भारी जुर्माना लगाया है। नियामकों ने दुनिया की इस दिग्गज साफ्टवेयर कंपनी पर अब तक का यह सबसे बड़ा अर्थदंड वर्ष 2004 में उसके आदेश का पालन न करने के कारण लगाया है। कंपनी द्वारा अपने पेटेंट प्राप्त विंडोज आपरेटिंग सिस्टम के बदले वसूली जाने वाली रायल्टी जायज नहीं थी।

पिछले 50 सालों में माइक्रोसाफ्ट पहली ऐसी कंपनी है जिस पर कमीशन का आदेश न मानने के आरोप में जुर्माना लगाया है। यूरोपीय कंपटीशन कमीशन के अध्यक्ष नीली क्रोस ने बुधवार को बताया कि यह निर्देश माइक्रोसाफ्ट के विश्वास हनन (एंटी ट्रस्ट) रवैये के काले अध्याय को समाप्त कर देगा। उन्होंने कहा कि इस जुर्माने को मिलाकर माइक्रोसाफ्ट पर अब तक कुल 1.68 अरब यूरो (लगभग 100 अरब रुपये) का अर्थदंड लगाया जा चुका है। इससे पहले साफ्टेवयर बाजार में अपने प्रभुत्व को बरकरार रखने की खातिर अपनाए गए विश्वास हनन रवैये के कारण कंपनी पर 77.8 करोड़ यूरो (लगभग 46.6 अरब रुपये) का जुर्माना लगाया गया था। कमीशन की नाराजगी कम करने की खातिर माइक्रोसाफ्ट ने पिछले हफ्ते अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की मदद करने की घोषणा की थी।


बैंक खाता खुलवाना अब और आसान

नई दिल्ली. अपने घर में रहने के बावजूद राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या बिजली बिल न होने की स्थिति में भी अब बैंक खाता खुलवाया जा सकेगा। रिजर्व बैंक ने इसके लिए मौजूदा नियमों में ढील देते हुए लाखों ग्राहकों के साथ-साथ बैंकों को भी बेहद राहत पहुंचाई है। अब अगर माता-पिता और भाई-बहन के नाम से राशन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र है तो अपने इन संबंधों का प्रमाणपत्र देकर बैंक खाता खोला जा सकेगा। अभी तक जिस व्यक्ति को खाता खोलना होता है, उसके नाम से ही अधिकारिक प्रपत्र होना आवश्यक है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी कर इस नियम को आसान बना दिया है।

वर्ष 2004-05 में आरबीआई ने बैंक ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित करने और रुपये के गैर कानूनी लेन-देन पर रोक लगाने के लिए 'केवाईसी' नियम लागू किए थे। इसके बाद से ही आम आदमी के लिए बैंक खाता खोलना बेहद मुश्किल हो गया था। अपने घर में रहने के बावजूद अगर बिजली-टेलीफोन कनेक्शन मां-बाप के नाम से है तो बैंक खाता खोलने से मना कर देते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति को दो प्रमाण पेश करने होंगे। एक तो जिस आदमी के नाम से कागजात हैं उसकी प्रतिलिपि और दूसरे उस व्यक्ति के साथ अपने संबंधों की प्रतिलिपि।

इसके आधार पर बैंकों में खाता खोला जा सकेगा। बैंकों और ग्राहकों की तरफ से मिलने वाली शिकायतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा है कि केवाईसी नियम इस तरह से लागू होने चाहिए कि आम आदमी को कोई परेशानी नहीं हो। खासतौर पर समाज के पिछड़े वर्ग पर बैंकों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया है कि केवाईसी को लागू करने का मकसद यह था कि बैंक अपने ग्राहकों की पहचान के बारे में संतुष्ट हो सकें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी हो तो फिर शीघ्रता से कार्रवाई की जा सके।

यह सारी प्रक्रिया वर्ष 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुई थी। आतंकवादियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कार्रवाई के तहत अधिकांश देशों ने इस तरह के कदम उठाए हैं। भारत में स्वयं बैंक अंदरखाने में इसका काफी विरोध करते रहे हैं। एक तरफ ज्यादा से ज्यादा लोगों का बैंक खाता खोलने के लिए उन पर सरकारी दबाव रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिजंर्व बैंक ने खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया ही काफी कड़ी कर दी। खास तौर से गरीब तबके या ग्रामीण इलाकों में आवश्यक पहचान पत्रों की बेहद कमी है। अब शायद बैंकों को राहत मिलेगी। इसी तरह आम आदमी को भी खाता खुलवाने के लिए बैंकों के सामने चिरौरी नहीं करनी पड़ेगी।


अब क्षेत्रीय भाषा में भी डोमेन नाम

नई दिल्ली। अंग्रेजी भाषा नहीं जानने वाले लोगों को अब 'डोमेन' नाम क्षेत्रीय भाषाओं में भी मिल सकेंगे, क्योंकि 'डोमेन' पंजीकरण प्रदान करने वाली कंपनी एफिलियास ने कहा है कि वह इस साल के अंत तक यह सुविधा शुरू कर देगी।

कंपनी ने एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की है जो इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय भाषा में 'डोमेन' नाम का पंजीकरण करने में मदद करेगा। यह गैर अंग्रेजी भाषी लोगों को ऐसे वेब और ई-मेल पतों को प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा जो पहले उन्हें अनुपलब्ध रहता था। 'डोमेन' नाम इंटरनेट पर कंप्यूटर अथवा कंप्यूटरों के नाम की शिनाख्त करता है। किसी ई-मेल के पते में कोई विशेष नाम जिसके बाद 'एट द रेट आफ' का चिह्न लगा होता है उसे 'डोमेन' नाम भी बोला जाता है।

एफिलियास के उपाध्यक्ष (व्यवसाय परिचालन) राम मोहन ने कहा कि कंपनी आरंभ में देवनागिरी और द्रविड़ समूह की भाषा पर काम करेगी और उसके बाद लगभग 14 भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। एफिलियास डाट मोबाइल इंटरनेट में आईएनएफओ डाट ओआरजी डाट मोबी के लिए ऐरोस्पेस उद्योग के लिए डाट ऐरो और एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए डाट एशिया पंजीकरण सेवा प्रदान करती है।

इस बीच इंटरनेट पते वाली प्रणाली का कामकाज देखने वाली इकाई आईसीएएनएन 11 फरवरी से एक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक बैठक आयोजित करेगी, जिसमें वह भारतीय भाषाओं में अंतरराष्ट्रीय 'डोमेन' नाम (आईडीएनएस) पर ध्यान केंद्रित करेगी।